सांबा–मानसर मार्ग को लेकर लोगों का आंदोलन रंग लाया, BRO ने ₹38.84 करोड़ की राशि मंजूर की

 



सांबा, 3 सितंबर: सांबा–मानसर मार्ग की बदहाली और लंबे समय से बंद पड़े संपर्क मार्ग को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश आखिरकार आंदोलन में बदल गया। मार्ग की बहाली की मांग को लेकर लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। इस दौरान सांबा में नड का बाजार बंद रहा, मेटाडोर चालकों और आम जनता ने भी आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। लोगों ने एकजुट होकर प्रशासन और संबंधित विभागों से मार्ग को जल्द बहाल करने की मांग उठाई।

आंदोलन के दौरान लोगों ने सवाल उठाया कि जब यह मार्ग हजारों लोगों के दैनिक आवागमन, व्यापार और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है, तो इसकी बदहाली की ओर लंबे समय तक ध्यान क्यों नहीं दिया गया। 

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दुकानदारों, वाहन चालकों, विद्यार्थियों और दूर-दराज से आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।




आंदोलन के बीच मिली बड़ी राहत

लोगों की मांग और लगातार उठ रही आवाज के बीच अब इस मार्ग के लिए बड़ी राहत सामने आई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, BRO ने सांबा–बट्टल रोड के पुनर्वास कार्य के लिए ₹38.84 करोड़ के आवंटन के आदेश जारी कर दिए हैं। उनके अनुसार यह राशि एक सप्ताह के भीतर जारी की जाएगी और काम तत्काल शुरू किया जा रहा है।

यह कदम स्थानीय लोगों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से सड़क की मरम्मत और बहाली की मांग की जा रही थी।

सड़क बनने से क्या होगा फायदा?

सांबा–मानसर क्षेत्र में सड़क की बेहतर कनेक्टिविटी होने से आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं—

  • स्थानीय लोगों का आवागमन आसान और सुरक्षित होगा।
  • सांबा और मानसर के बीच यात्रा का समय और परेशानी कम होगी।
  • मेटाडोर, टैक्सी और अन्य वाहन चालकों को सीधा लाभ मिलेगा।
  • स्थानीय बाजारों और छोटे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।
  • मानसर पर्यटन को नई गति मिल सकती है।
  • दूर-दराज के गांवों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
  • किसानों और स्थानीय उत्पादकों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी।
  • सड़क बेहतर होने से नए व्यापार और रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
  • क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने से होटल, रेस्तरां, दुकानों और परिवहन व्यवसाय को फायदा मिल सकता है।

सांबा–मानसर क्षेत्र की हो सकती है कायाकल्प की शुरुआत

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि ₹38.84 करोड़ की राशि का सही और पारदर्शी तरीके से इस्तेमाल कर सड़क का गुणवत्तापूर्ण पुनर्वास किया जाता है, तो यह केवल एक सड़क की मरम्मत नहीं होगी, बल्कि सांबा–मानसर क्षेत्र के विकास की नई शुरुआत साबित हो सकती है।

लोगों का मानना है कि सड़क के बेहतर होने से केवल आवागमन आसान नहीं होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। 

ट्रकों और अन्य वाहनों की आवाजाही बढ़ने से सड़क किनारे ढाबे, मैकेनिक की दुकानें, पंचर की दुकानें, छोटे होटल, चाय-नाश्ते की दुकानें, पेट्रोलियम एवं अन्य परिवहन संबंधी व्यवसाय विकसित हो सकते हैं।

इससे स्थानीय युवाओं और छोटे कारोबारियों को अपनी आजीविका बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं।

अब लोगों की नजर इस बात पर है कि घोषित राशि कब जमीन पर काम में बदलती है हालांकि जेसीबी मशीनों द्वारा पस्सियां तोड़ने का काम शुरू हो चुका है। सड़क का निर्माण कितनी गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाता है यह बात भी देखने योग्य होगी। आंदोलन में आम जनता, बाजार और मेटाडोर चालकों की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि सड़क का मुद्दा किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक समस्या है।

लोगों की एक ही मांग है—घोषणा नहीं, अब धरातल पर काम चाहिए। सांबा–मानसर मार्ग की जल्द बहाली हो और यह सड़क क्षेत्र की तरक्की की नई पहचान बने।