केंद्र सरकार ने जनसंख्या बदलाव की समिति क्यों बनाई और जम्मू-कश्मीर क्यों आईं है?






केंद्र सरकार ने जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Changes) की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। इसका मकसद है – देश में अवैध घुसपैठ और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसंख्या बदलाव का अध्ययन करना और समाधान सुझाना।


समिति क्यों बनाई गई?

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को अपने भाषण में इस समिति की घोषणा की थी।

- मई 2026 में गृह मंत्रालय ने इसे आधिकारिक रूप से गठित किया।

- समिति की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर कर रहे हैं।

- इसमें जनगणना आयुक्त, पूर्व आईएएस अधिकारी, पूर्व आईपीएस अधिकारी और अर्थशास्त्री शामिल हैं।

- समिति को 1 साल में रिपोर्ट देनी है।


सरकार का कहना है:

- अवैध घुसपैठ से हो रहा जनसंख्या बदलाव देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक ढांचे के लिए बड़ा खतरा है।

- समिति इस बदलाव के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी।

- अवैध घुसपैठियों की पहचान, हिरासत और वापसी भेजने का स्थायी सिस्टम बनाने का सुझाव देगी।


जम्मू-कश्मीर क्यों गई है समिति?

यह समिति का पहला बड़ा दौरा है (10-12 अगस्त 2026)।


क्यों?

- जम्मू क्षेत्र (खासकर सीमा के पास के इलाके) में अवैध घुसपैठ की शिकायतें ज्यादा हैं।

- सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जम्मू और सांबा जिलों में 13,700 से ज्यादा विदेशी (रोहिंग्या और बांग्लादेशी) बसे हुए हैं।

- 2008 से 2016 के बीच इनकी संख्या 6,000 से ज्यादा बढ़ गई।

- सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि कुछ अवैध बसे लोग आतंकियों की मदद कर सकते हैं।


समिति ने क्या किया?

- कश्मीरी पंडितों की सबसे बड़ी कॉलोनी **जगती टाउनशिप** (नगरोटा) का दौरा किया।

- नारवाल इलाके में रोहिंग्या बस्ती का निरीक्षण किया।

- मुख्य सचिव, डीजीपी और कई स्थानीय संगठनों से मुलाकात की।

- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) के शरणार्थियों से भी बात की।


संक्षेप में:

समिति पूरे देश में अवैध घुसपैठ से हो रहे जनसंख्या बदलाव का अध्ययन कर रही है। जम्मू-कश्मीर इसलिए चुना गया क्योंकि यहाँ सीमा के पास सुरक्षा और जनसंख्या बदलाव दोनों के मुद्दे गंभीर माने जा रहे हैं।