हथकड़ियों में अदालत लाया जाना: कानून व्यवस्था या मौलिक अधिकारों का सवाल?

 



युवा राजपूत सभा के प्रधान दिलावर सिंह मन्हास को कथित तौर पर हथकड़ियां लगाकर अदालत में पेश किए जाने की घटना ने सामाजिक और कानूनी हलकों में बहस छेड़ दी है। मामला सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीएमओ के साथ हुई कथित कहासुनी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके बाद पुलिस ने उनके विरुद्ध कार्रवाई की।

कानून के जानकारों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध अपराध का मामला दर्ज होता है तो पुलिस को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे मामले में, जहां आरोपी के हिंसक होने, फरार होने या सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होने का कोई स्पष्ट कारण सामने न हो, उसे हथकड़ियां लगाकर सार्वजनिक रूप से अदालत में पेश करना उचित है?

भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार केवल शारीरिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति की गरिमा की रक्षा भी इसका अभिन्न हिस्सा है। वहीं अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान करता है।

उच्चतम न्यायालय ने भी विभिन्न मामलों में स्पष्ट किया है कि किसी आरोपी को नियमित रूप से हथकड़ियां लगाना उचित नहीं है। हथकड़ी का प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, जब आरोपी के फरार होने, हिंसक व्यवहार करने या सुरक्षा को वास्तविक खतरा होने के ठोस कारण मौजूद हों। केवल गिरफ्तारी होना हथकड़ी लगाने का स्वतः आधार नहीं माना जा सकता।

ऐसे में दिलावर सिंह मन्हास को हथकड़ियों में अदालत लाए जाने की घटना ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या यह कदम वास्तव में आवश्यक था या इससे व्यक्ति की गरिमा और उसके संवैधानिक अधिकारों पर अनावश्यक आघात पहुंचा।

हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध तथ्यों पर निर्भर करेगा। यदि पुलिस के पास हथकड़ी लगाने के पर्याप्त कानूनी और सुरक्षा संबंधी कारण थे तो उसका मूल्यांकन न्यायालय करेगा। वहीं यदि ऐसा नहीं था, तो इस कार्रवाई की वैधता और औचित्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

फिलहाल यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक बहस का विषय बन गया है कि कानून का पालन करते हुए नागरिकों के मौलिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाए।